Skip to main content

Posts

Featured

मेरे प्रभु राम से अयोध्या फिर से जगमगाई है - Shree Ram Bhajan

राजनीति का कोई न होता धर्म — भारत की बेटी की इज्जत शर्मशार होती हुई

राजनीति का कोई न होता धर्म   राजनीति का कोई न होता धर्म  ये कभी नही करते अपने कर्म  लोगो के लिए न है इनमे कोई शर्म कसम खाते है देश के लिए  और इस देश की नही है इन्हे फिक्र  कभी मरते है देश के जवान  कभी सड़क पर उतर आते है किसान और इस बार तो हो गई है हद एक लड़की की इज्जत की निकाली सरेआम परेड   न आई किसी को शर्म ना आई किसी को लज्जा शर्मसार हो गई भारत की बेटी की लज्जा यह सब देखकर कांप उठती इंसान की रूह इस खबर को नहीं दिखाता है कोई बस न्यूज में चलता है सीमा हैदर और ज्योति मौर्य की खबर यहां लव जिहाद के उठते है मुद्दे पर एक बेटी के लिए नहीं आती कोई खबर जागो भाईयो जागो अब इंसानियत के लिए जागो सरकार कोई भी हो हक हमारा है अपनी आवाज उठाने के लिए अधिकार हमारा है न किसी के आगे झुकेंगे न किसी के आगे टेके घुटने हम सब मिलकर सरकार से मांगे जवाब  आओ करे राजनीति का हिसाब  बेटियो को दिलाए इंसाफ  एक भारत का करे निर्माण  सब रहे सुरक्षित सबको मिले इंसाफ और सबका हो विकास । धन्यवाद  आपका नवी

PEOPLE WHO KEEP THINKING ALL THE TIME - जो व्यक्ति हर समय सोचते रहते है वह एक बारे जरूर पढ़े

जो व्यक्ति हर समय सोचते रहते है  वह एक बारे जरूर पढ़े  एक बार चीन के हिस्से में बहुत बड़ा  मठ था उस मठ में लगभग 500 भिक्षु रहते थे।  वह सब अपने गुरु के मार्गदर्शन में खुद को पहचानने का प्रयास कर रहे थे।  एक दिन एक लड़का उस मठ में शिष्य बनने के लिए आया उसे गुरु से मुलाकात की और गुरु से कहा की मैं खुद जानना चाहता हूँ ,  मैं सच की तलाश कर रहा हूँ और मैं जानना चाहता हूँ की सच क्या होता है  गुरु ने उस लड़के के तरफ देखा और कहा की तुम सच जानना चाहते हो तो तुम्हे अपना पूरा जीवन दांव पर लगाना होगा और फिर भी यह नहीं कहा जा सकता की इस जीवनकाल में तुम सच का पता लगा सकते हो या नहीं।  गुरु ने कहा की क्या तुम इसके लिए त्यार हो , यह सुनकर उस शिष्य ने कहा की गुरु जी मैं यहाँ पीछे मुड़ने के लिए नहीं आया हूँ।  मैं इसके लिए त्यार हूँ तो गुरु ने कहा अगर ऐसा है तो एक काम करो इस मठ में पांच सो भिक्षु है तुम उनके लिए चावल कूटने का काम करो तुम सुबह से लेकर शाम तक चावल कूटने का काम करते रहो और जब तुम थक जाओ तो तुम सोने चले जाओ और फिर उठ कर तुम चावल कूटने का काम शुरू कर दो इस तरह तुम हर सुबह बस यही काम करते रहो इसके

पहले माँ के सामने सर झुकाओगे या फिर भगवान् के सामने (Mother or God)

अगर आपसे पूछा जाये की सबसे  पहले माँ के  सामने सर झुकाओगे या फिर भगवान्   के सामने  आप सबसे पहले अपनी माँ के सामने सर झुकाओगे क्योकि माँ ही तो आपकी पहली गुरु होती है और माँ ही तो आपकी जन्मदाता होती है आपके जन्म लेने के बाद आपको सब कुछ तो माँ ही सिखाती है कि चलना कैसे है खाना कैसे है और रहना कैसे है और भगवन कौन है अगर माँ ही आपको नहीं सिखाती और बताती  की भगवान कौन है तो आपको कैसे पता लगता है की भगवन कौन है।  आपके लिए सबसे पहले आपकी माँ ही भगवान का रूप है और आप इस बात को झुठला नहीं सकते है।  और न ही इस बात का भगवान इंकार कर सकते है।  क्योकि भगवान ने ही तो माँ को सबसे पहले ये दर्जा दिया है।    माँ से इतना प्यार क्यों करते है सब  ऊपर दिए बातो से हमें ये एहसास हो  गया है की माँ ही हमारी जन्मदाता है और हमें  हमारी जीवनशैली में हमारी माँ ही हमें सब कुछ सिखाती है वो हमेशा हमारी फ़िक्र करती है बचपन से लेकर जवानी तक एक माँ ही तो है जो हमारी फ़िक्र करना नहीं छोड़ सकती है। माँ ही तो हमें पापा की पिटाई से बचाती है।  माँ के लिए तो हम जितने अलफ़ाज़ लिखे वह भी कम पड़  जाते है। एक माँ ही तो है जो हमें देख कर

A Poem for Father - पापा बच्चो के लिए हिम्मत (Importance of Father)

पापा बच्चो के लिए हिम्मत  पापा के शब्द से ही मन में हिम्मत आती है पापा की छवि मन में समाती है पापा अपने बच्चो को हिम्मत देने वाली एक कुंजी है क्योकि बच्चे ही तो पापा के लिए पूंजी है  देखो कैसा समय आ गया है कि  पापा दिल में गम लिए  चुप बैठे है और बच्चे है की पापा से रूठे बैठे है पापा ही तो बच्चे को ऊँगली पकड़ कर चलना सिखाते  है  बच्चे को कभी गोदी तो कभी पीठ पर घुमाते है  और जब बच्चो का ये सब करने का समय आता है  तो वही बच्चा पापा से कोसो मील दूर हो जाता  है  पापा बच्चो से कभी शिकायत नहीं करते है  बच्चो के फैसलों पर उनके साथ खड़े होते है  और आज के बच्चे अपने ही पापा को गलत समझते रहते  है  फिर वही बच्चे अपने पापा के फैसलों पर ऊँगली उठाते है  और बच्चे अपना समय भूल जाते है  पापा के लिए बच्चे कभी अकेले  नहीं होते है  क्योकि बच्चो की परछाई बनकर पिता हमेशा उनके साथ होते  है।  Kalyug Changed everything - (देखो भाई कैसा कलयुग आया है ) जिद्दी बच्चे की कहानी - how to explain to a stubborn child मैं उम्मीद करता हूँ आप सभी  को मेरी कविताये और मेरी सोच पसंद आती है  अगर आपको कोई भी कमी मिले तो कृप्या आप

यादें (MEMORIES) - हर इंसान के साथ रहती है

यादें - हर इंसान के साथ रहती है  यादें याद आती है  हर पल सताती है  बिन बुलाये चली आती है  हर वक़्त जहन में रहती है  यादो का क्या है जिंदगी भर साथ निभाती है,  यादों के सहारे जिंदगी गुजर जाती है ,  कभी चेहरे पर हंसी के भाव लाती है,  तो कभी अश्कों से छलक जाती है,   इन यादों का संबंध हर इंसान से होता है,  कोई यादों को दिल में ही दबाये रहता है  तो कोई यादों को खुल कर सबके सामने जताता है, इंसान चले जाते है पर उनकी याद परछाई की तरह साथ रहती है  ये यादें ही तो है जिनका समबन्ध सीधा दिल से होता है  क्योकि दिल में ही तो ये यादो का बसेरा होता  है।  Kalyug Changed everything - (देखो भाई कैसा कलयुग आया है ) जिद्दी बच्चे की कहानी - how to explain to a stubborn child मैं उम्मीद करता हूँ आप सभी  को मेरी कविताये और मेरी सोच पसंद आती है  अगर आपको कोई भी कमी मिले तो कृप्या आप मुझे बताये हम मिलकर उस कमी को दूर करेंगे। अगर आपको मेरी यह कविता पसंद आयी है तो आप कमेंट और शेयर जरूर करे।  आप मुझे मेरी मेल पर भी सम्पर्क कर सकते है npcoolguy1@gmail.com आपकी अपना ब्लॉग www.idealjaat. com धन्यवाद  आपका नवी 

Special Women day - ज़िंदगी की खूबसूरत कहानी है औरत

 ज़िंदगी की खूबसूरत कहानी है औरत  औरत की कहानी सबकी ज़ुबानी  उपरवाले ने धरती पर एक खूबसूरत तोहफा दिया जिसे हम सबने औरत का नाम दिया।  औरत को अपनाया तो सबने लेकिन किसी ने इसे अपनी पलकों पर बिठाया तो किसी ने जूती की धूल समझ कर ठुकराया।  किसी ने औरत को घर में बिठाया तो किसी ने तिरिस्कार करके घर से निकला।  समय समय पर औरत ने अपनी हिम्मत का परिचय दिया और साबित किया की हमारे बिना इस संसार का कोई वज़ूद नहीं है।  पत्नी जीवन संगनी का रूप  औरत के रूप  इस संसार में औरत को अनेको रूपों में बुलाया गया है , जब जन्म लिया तो बेटी के रूप में जाना गया , जब शादी हुई तो बहू के रूप में , जब बच्चे को जन्म दिया तो माँ के रूप में , जब बेटे के पत्नी घर आयी तो साँस का नाम मिला।  इसी तरह औरत को अलग अलग किरदार में देखा जाता है।  जिसका अपना कोई  घर नहीं होता है।  बस समय समय पर उसके घर और किरदार बदलते जाते है।   हर दुःख दर्द को सहकर वो मुस्कुराती है  पत्थर की दीवारों को वो घर बनाती है  उसकी मुस्कुराहट ही घर को स्वर्ग बनाती है  दुनिया उसे कमजोर बताते है  लेकिन वही इस कमज़ोर दुनिया को जीना सिखाती है।  दुनिया के सामने मजबूत

Wife - पत्नी जीवन संगनी का रूप है

पत्नी क्या है  - नीचे पढ़ो नीचे  पत्नी वो शख्सियत है   जो अपने माता पिता को छोड़ कर  अपने पति के माता पिता को अपनाती है।  जो अपना घर त्याग कर  अपने पति के घर को अपनाती है।  जो अपने  बचपन  के अल्हड़पन  छोड़ कर   अपनी सूझ बुझ से जवानी को अपनाती है।  जो अपने सारे दुःख भूल कर  पति के दुःख को अपनाती है।    जो अपने दोस्तों का साथ छोड़ कर  अपने पति को दोस्त के रूप में अपनाती है।  जो अपने बहते अश्को को रोककर   अपनी मजबूरिया छिपाती है।   जो अपने पति की खुशियों के लिए  सारे जग से लड़ जाती है।  जो छोटे से सपने लेकर  अपने पति के घर को स्वर्ग बनाती है।  जो अपने ख्वाब भूलकर  अपने  जीवन को पति और बच्चो पर न्यौछावर करती है।    जो पति के गमो को  बिन बोले समझ जाती है।  जो पति के जीवन का वह हिस्सा है जिसे हम जीवन संगनी के रूप में  जानते है।   पत्नी रात में अमावस का चाँद है  तो सुबह सूरज की पहली किरण लगती है।    हर कोई पत्नी की खामिया तो गिनवा देता है  पर पत्नी की कोई खुबिया नहीं गिनवाता है।  पत्नी पर जोक तो हर कोई बना देता है  पर पत्नी की हिम्मत को कोई नहीं दिखाता है।  Kalyug Chnaged is everythings यह कविता उन

Kalyug Changed everything - (देखो भाई कैसा कलयुग आया है )

 देखो भाई कैसा कलयुग आया है  राधा कृष्णा जैसा प्रेम कोई समझ न पाया है  यहां तो सिर्फ हवस में ही प्रेम समाया है देखो भाई कैसा कलयुग आया है।  यहां राम और लक्ष्मण का भाईचारा  कोई समझ नहीं पाया है  जायदाद के लिए भाई ने ही भाई का खून बहाया है  देखो भाई कैसा कलयुग आया है।  श्रवण के भाव माता पिता के लिए कोई नहीं समझ पाया है  आज कल तो माता पिता को बेटा ही आश्रम में छोड़ कर आया है  देखो भाई कैसा कलयुग आया है।  हरीशचंद्र जैसा सत्यवादी कोई नहीं कहलाया है  आज कल तो झूठ ने ही सबको अपनाया है  देखो भाई कैसा कलयुग आया है।  एक समय पर कुनबा ही परिवार कहलाया है  आज कल तो माता  पिता से अलग होकर ही परिवार भाया  है  देखो भाई कैसा कलयुग आया है।  सीता माता  जैसी स्त्री ने पति धर्म निभाया है  आज कल की स्त्रियों ने तलाक लेकर पति से छुटकारा पाया है  देखो भाई कैसा कलयुग आया है।  भगत सिंह जी ने  शहीद होकर  आज़ादी का मतलब  समझाया है  पर आज कल की राजनीती ने हमे फिर से गुलाम  बनाया है देखो भाई कैसा कलयुग  आया है।  रानी लक्ष्मीबाई ने महिलाओ को लड़ना सिखाया है  आज उसी सीख से महिलाओ ने देश में अपना सम्मान बढ़ाया है  देखो  भ

Missing Childhood days (वो बचपन के दिन )

वो बचपन के दिन    वो बचपन के दिन वो बचपन की बाते आज भी याद आती है।  वो मस्ती में रहना, माँ की डांट को हल्के में सहना, मिट्टी के घर बनाकर ख्वाबो की दुनिया मे रहना।  स्कूल का काम न हुआ तो , स्कूल न जाने के बहाने बनाना, फिर भी मम्मी ने जबरदस्ती स्कूल छोड़ के आना।  वो पेड़ो की छांव में बैठना  सावन में झूलो का आंनद था लेना।  गर्मियों की छुट्टियों में था नाना के जाना और ओर अगली छुट्टियां में रामलीला का था आनन्द लेना।  जब भी  करते थे  हम शरारत  माँ का पापा के गुस्से से हमे बचाना  घर मे कोई भी मेहमान का था आना, हमे पैसो का आता था लालच आना।  Friendship Goals Poem- click here बचपन में सबके साथ था खेलना , फिर भी मन मे जात पात ओर धर्म का ख्याल भी न आना।  इतना प्यार था हमारा वो बचपन का जमाना। वो बचपन के दिन वो बचपन की बातें आज भी बहुत याद आती है। जीवनसाथी हो ऐसा राधा कृष्णा के प्यार जैसा  #नवी माँ मेरा अभिमान है - माँ मेरा स्वाभिमान है  मेरा गांव है शहर से निराला - गांव की सभ्यता  कविता (Poetry , Poem) Stories (कहानिया) अगर आपको मेरी ये कविता बचपन के दिन अच्छी लगी हो तो इसे शेयर और कमेंट जरूर करे।  औ

Friendship Goal - दोस्ती एक एहसास

 दोस्ती एक एहसास  मैं यादों का पिटारा खोलू तो  कुछ दोस्त बहुत याद आते है।  भले ही कितने निक्क्मे होते है दोस्त लेकिन  उनके साथ बिताये हुए हर लम्हे याद आते है।  दोस्ती की सबसे खास बात होती है  कि दोस्ती की कोई जात पात नहीं होती है।  दोस्ती का एक ईमान होता है  कि दोस्ती से बड़ा कोई ईमान नहीं होता।  दोस्त कमीने जरूर होते है  लेकिन सुख दुःख में दोस्त ही साथ होते है।  लड़ते है  झगड़ते है  फिर भी साथ रहते है दोस्त  क्योकि अपने यारो पर जान निसार करते है दोस्त।  जैसे चाय में अदरक के बिना स्वाद नहीं आता  वैसे ही ज़िंदगी में दोस्तों के बिना निखार नहीं आता।  दोस्ती का भी अपना एक उसूल होता है , की दोस्ती में कमीनापन जरूर होता है।  दोस्ती एक एहसास है  इसलिए तो हर किसी की जिंदगी में दोस्त खास है।  पति और पत्नी के बीच का रिश्ता बड़ा अनमोल और प्यारा होता है     संघर्ष ही जीवन का उद्देश्य है दिवाली के उत्स्व पर बनाई गयी रंगोली  जिद्दी बच्चे को कैसे समझाये  thoughts (विचार ) कहानिया  कविता (Poetry ) अगर आपको मेरी यह कविता अच्छी लगी हो तो कमेंट करके जरूर बताये  और इसे शेयर जरूर करे ।  आप हमारे ब्लॉग पर अपनी क

Happy Diwali - 2021(रंगोली)

  दीपावली की शुभकामनाएं आप सभी को दीपावली की शुभकामनाएं ये दीवाली के पावन अवसर पर मैंने रंगोली बनाई है। आशा करता हूँ कि आप सभी की दीपावली बहुत अच्छी रही हो। आप सभी को मेरी ओर आपके अपने ब्लॉग www.idealjaat.com की तरफ से दीपावली , भाईदूज, गोवर्द्धन महाराज ओर छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं। धन्यवाद आपका नवी 

Rooted - boy and discrimination Girl(अंतर् - लड़का और लड़की में भेदभाव )

अंतर् - लड़का और लड़की में भेदभाव  एक छोटा  परिवार शहर में रहता था।  घर का मुखिया अमित एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर की पोस्ट पर था और उनकी पत्नी  सीमा हाउस वाइफ थी।  उनके दो बच्चे राहुल और रानी थी।  दोनों बच्चो में एक साल का अंतर था।अमित के माता पिता गाँव में रहते थे। एक दिन अमित के माता पिता गांव से शहर बच्चो से मिलने आये।   जिद्दी बच्चे  की कहानी - एक माता पिता अपने ज़िद्दी बच्चे को कैसे सुधारे  अमित उन्हें लेने रेलवे स्टेशन पर गया और आधे घंटे बाद उनकी रेल आ गयी अमित ने उनका  समान लिया और उन्हें गाड़ी में बिठा घर की तरफ चल दिया। गाड़ी में बैठते ही अमित के माता पिता ने कहा की हमारा पोता कैसा है।  अमित ने कहा की आप घर ही चल रहे हो मिल लेना।  और फिर अमित ने कहा की आपको रेल में कोई परेशानी तो नहीं हुई। अमित के माँ ने कहा की नहीं हम तो आराम से आये है और तेरे लिए और पोते के लिए अचार भी लाये है, पर तेरे पिता जी रस्ते में सोये ही नहीं उन्हें डर था की कोई समान चुरा न ले जाए और ये कह कर अमित और उसकी माता हंसने लगी।  अमित के पिता ने कहा की तुम दोनों मिलते ही मेरी खिचाई करने लग जाते हो।  और पूछा की म

जिद्दी बच्चे की कहानी - how to explain to a stubborn child

एक जिद्दी बच्चे को कैसे समझाये और सुधारे  एक छोटा ज़िद्दी बच्चा था जिसका नाम राहुल था।  उसे बाहर का खाना खाने की आदत थी जैसे पिज़्ज़ा, बर्गर, चिप्स, पेटीज , कोल्ड्रिंग इत्यादि।  उसके माता और पिता इस बात से बहुत परेशान थे।  उन्होंने उसे समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन राहुल उनकी बात नहीं सुनता था और ज़िद करता या फिर रोने लग जाता था। एक दिन राहुल स्कूल से आया और मम्मी को घर आकर बोला की मम्मी बहुत तेज भूक लगी है कुछ खाने को दे दो।  Click here for Amazon Prime Video मम्मी: ने कहा की ठीक है बेटा मैं पोहा बना देती हूँ।  राहुल : नहीं मुझे पोहा नहीं खाना मुझे बर्गर और कोल्ड्रिंग चाहिए।  मम्मी : घर में फल रखे है वो खा ले , केले और सेब है  राहुल : नहीं मुझे तो कोल्ड्रिंग और मेग्गी या बर्गर  चाहिए।  मम्मी : उसकी ज़िद के आगे झुक गयी और कहा ठीक है कोल्ड्रिंग लिया मैं मैग्गी बना देती हूँ।  राहुल : बहुत खुश हुआ और कोल्ड्रिंग ले आया और उसने मेग्गी और कोल्ड्रिंग लिया।  उस दिन रात को राहुल की मम्मी ने पराठा और पनीर की  सब्जी बनाई। राहुल के पापा और मम्मी खाने के लिए साथ आकर बैठे।   राहुल :  मुझे भूख नहीं है आप