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मनुष्य की इच्छाएं असीमित और अन्नंत

मनुष्य की इच्छाएं असीमित और अन्नंत  मनुष्य को भगवान ने ऐसा बनाया है की वह  सोचने समझने  और उसे करने की शक्ति रखता है , उस तरह से मनुष्य इच्छाएं भी रखता है , हमे यहां इच्छाओ का अर्थ समझ लेना  चाहिए क्युकी  इच्छाएं के कई रूप होते है जैसे चाह की वस्तु, इच्छा, कामना , अभिलाषा , मन्नत , तमन्ना, आरजू, मर्जी अन्य ! और मनुष्य इन सभी को पाना चाहता है , और इन्हे पाने के लिए वह कुछ भी करने को तैयार रहता है!  भगवान् ने मनुष्य का सवभाव ही ऐसा बनाया है की उसकी इच्छाएं  कभी खतम नहीं होती है ! इच्छाएं करना स्वभाविक  मनुष्य का स्वभाव ही ऐसा है , कि इच्छाएं मनुष्य को जीने नहीं देती और मनुष्य इच्छाओ  को मरने नहीं देता ,  वह हर समय किसी न किसी वस्तु चाह की कामना करता रहता है ,  क्युकी किसी वस्तु की कामना, अभिलाषा या आरजू करना उसके लिए स्वभाविक है या कह सकते है की यह उसके स्वभाव में है ! एक आम मनुष्य के पास सब कुछ होता है जो  उसे चाहिए होता है जैसे रोटी, कपड़ा , मकान और थोड़ा बहुत खाना एक छोटा परिवार उसे में वो अपनी खुशिया ढूंढ लेता है ! लेकिन इच्छाएं मनुष्य मन  रहती है जैसे वो काम करके पै

हमारे जीवन में महिलाओ का महत्व

महिलाओं की महत्वपूर्णता  हमारे जीवन मतलब मनुष्य के जीवन में महिलाओ का बहुत मत्वपूर्ण भाग है , क्युकी महिलाएं हर घर  परिवार में एक मत्वपूर्ण भूमिका निभाती है ! महिलाओ के बिना हर कोई अधूरा है , इनकी अपने आप में ही अलग महत्वपूर्णता है  , हम इनकी भूमिका पुराणों , इतिहास में देखते आये है और वर्तमान में भी देख रहे है!  महिलाओ के रूप  महिलाओ को अनेक रूपों में देखा जाता है आम मनुष्य की जिंदगी में कभी तो यह माँ की भूमिका निभाती है तो कभी बहन , कभी बेटी, कभी बहु, कभी पत्नी , कभी साँस   और भी बहुत सारे रूपों में इनकी भूमिका है  ! महिलाओ की आम मनुष्य के जीवन में भूमिका  हमने अपने इतिहास में सुना है की महिलाओ को पुरुषो की पैरो की जूती बोला जाता है और आज भी ग्रामो में कई जगह महिलाओ को पुरुषो से निचे माना जाता है , लेकिन इतिहास में भी महिलाओ की अपनी अलग पहचान थी और आज भी है क्युकी अगर महिलाएं बच्चो को जन्म न दे तो पुरुष कहा से आयगे और इतिहास में महिलाओ का हर कदम पर अपमान होता था लेकिन फिर भी वह पुरुष और अपने परिवार के साथ कदम मिलाकर चलती थी ! एक समय था जब सती का दौर चलता था उस स

पापा हमारे आदर्श, गुरु , भगवान्

पापा हमारे आदर्श  पापा बनने  एहसास  पापा स्वयं में हमारे लिए भगवान्  है क्युकी जिस तरह माँ को हम  भगवान का रूप मानते है उसी तरह पापा हमारे लिए भगवान है ! जब एक व्यक्ति को पता लगता  वह पिता बनने वाला है उसकी पत्नी की गर्भ में उसका बच्चा पल रहा है, उसी समय  से उस व्यक्ति को अपने पिता होने की जिम्मेदारियों का एहसास हो जाता है ! फिर वह अपनी जिंदगी जीने के बजाए उस  होने वाले बच्चे के लिए जीने लगता है ! उस व्यक्ति के दिमाग ने अब उस होने वाले बच्चे  के लिए एक अलग सा मोह दिया  है ! वह अब अपनी जिंदगी की मौज मस्ती को छोड़ कर अपने उस होने वाले बच्चे के future के बारे में सोच ने लगा है ! उसे  बहुत ख़ुशी है की वह पिता बनने वाला है और वह सोच रहा है की वह अपने बच्चे के सपने कैसे पुरे करेगा उसको किस स्कूल में पढ़ायेगा उसकी जिंदगी के लिए कौन सी पॉलिसी ठीक रहेगी उसे वह बड़ा होकर क्या बनाएगा जो वह अपनी जिंदगी में खुद हाशिल नहीं कर सका वह  सारी खुशियाँ अपने बच्चे को  देगा और भी बहुत कुछ उसके दिमाग में चलता है जबकि वह अभी तक पिता नहीं बना ! लेकिन जब उसका बच्चा इस दुनिया में आता है तो वह बहुत खुश होता है ले

दोस्ती की अहमियत

दोस्ती की अहमियत हम सबके जीवन में  दोस्ती हर व्यक्ति के जीवन का एक अह्म  हिस्सा है जिस प्रकार व्यक्ति के जीवन में उसकी फैमिली अहमियत रखती उसी तरह उसके जीवन में अच्छे दोस्त और उसकी दोस्ती अहमियत रखती है ! हम दोस्ती के बारे में अपने इतिहास से देखते आये है कि हर व्यक्ति के जीवन में कोई न कोई दोस्त जरूर होता है और हमने दोस्ती के ऊपर बहुत सारे किस्से भी सुने है ! दोस्ती में सबसे अच्छी  बात यह है की वह किसी धर्म जात - पात , रंग-भेद  , अमीरी -गरीबी या फिर किसी पुरुष या स्त्री को देख कर नहीं होती है ! आज कल हम सब धर्म को लेकर लड़ते रहते है सब कहते है की हमारा धर्म सबसे बड़ा है चाहे वह हिन्दू हो मुस्लिम हो सिख हो या फिर ईसाई हो ! लेकिन ये दोस्ती ही है जो सबको एकता में बांधे रखती है और उन्हें एह्साह दिलाती है की हम सब बराबर है चाहे हम किसी भी धर्म के है क्युकी हम सबको पता है जब हमे चोट लगेगी तो हमारा खून जरूर निकलेगा और ऐसे समय में हमारा परिवार और हमारे दोस्त ही हमारे काम आयेगे ! दोस्त हमेशा हमारा साथ देता है  हर  किसी  के बचपन  से लेकर बुढ़ापे  तक दोस्त होते इनमे से कुछ बचपन के दोस्त होते

हँसने के फ़ायदे (Benefit of Smiles)

हंसना एक व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए जरूरी  हँसना  हमारे स्वास्थ्य के लिए  बहुत लाभकारी और जरूरी है ! एक समय था जब इंसान बहुत हस्ते थे वो हमेशा खुलकर ठहाके मारकर हँसते थे क्युकी उस समय इंसान खुलकर जीना जानता था वो एक परिवार के साथ मिलजुलकर रहता था उस परिवार में माँ पापा, दादा दादी, ताऊ ताई , चाचा चाची और सबके बच्चे ! लकिन आजकल इंसान इतना व्यस्त हो गया की वह हँसना ही भूल  गया कुछ तो काम  के लिए दूसरे देश या फिर दूसरे राज्य में जा रहे उन्हें परिवार का मतलब ही नहीं पता और जो परिवार के साथ रहते है वो उन्हें समय ही नहीं देते क्युकी वह खुद में इतने उलझे रहते है कि वे सभी  हँसना  और परिवार सब कुछ भूल चुके है उन्हें तो ये भी नहीं पता की  आखिरी समय परिवार के साथ कब मस्ती की थी !  आज कल इंसान इतना व्यस्त और तनावपूर्ण जिंदगी जी रहा है कि उसकी हंसी कही गायब सी हो गयी है ! आज हमे हँसने के लिए भी बहाने ढूंढने पड़ते है लकिन हँसना तो हमारी जिंदगी का एक हिस्सा है हमने देखा की हंसने के लिए हम सब comedy show या कॉमेडी मूवी देखते है क्युकी हम ये  इसलिए देखते कि  हमारा मूड और माइंड ठीक  हो सके हम इतने व

Lockdown 4.0 - Guidelines by Govt.

Lockdown 4.0  के लिए केन्द्र सरकार के दिशा - निर्देश नीचे दिए गए है! 31 मई तक क्या बंद रहेगा? अंतरराष्ट्रीय और घरेलू यात्री उड़ानें बंद रहेंगी। मेट्रो रेल भी अभी शुरू नहीं होंगी। सिनेमा हॉल, शॉपिंग मॉल, जिम, स्वीमिंग पूल, एंटरटेनमेंट पार्क, थिएटर, ऑडिटोरियम, असेंबली हॉल बंद रहेंगे। स्कूल, कॉलेज, एजुकेशन, ट्रेनिंग, कोचिंग इंस्टिट्यूट भी 31 मई तक बंद रहेंगे। ऑनलाइन डिस्टेंस लर्निंग चलती रहेगी। होटल और बार बंद रहेंगे। हर तरह के राजनीतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक कार्यक्रमों और जमावड़ों पर रोक जारी रहेगी। 31 मई तक क्या खुला रहेगा? अगर राज्य सरकारों के बीच आपसी सहमति बन जाती है तो दो राज्यों के बीच यात्री बसों और गाड़ियों की आवाजाही हो सकेगी। सरकारें अपने स्तर पर फैसला कर राज्यों के अंदर भी बसें शुरू कर सकेंगी। स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और स्टेडियम खुल सकेंगे, लेकिन दर्शकों की इजाजत नहीं होगी। रेस्टोरेंट्स से आप सिर्फ होम डिलिवरी के लिए खाना मंगवा सकेंगे। होम डिलिवरी करने वाले रेस्टोरेंट्स को किचन शुरू करने की इजाजत दी गई है। सिर्फ वही होटल चालू रहेंगे, जहां

'माँ' - भगवान का रूप

माँ शब्द अपने अपने आप में  परिपूर्ण  'माँ' ये शब्द अपने आप में  ही पूर्ण है माँ  के  बारे में  आप कितना भी लिख लो  वो अपने आप  में अधूरा  और अपूर्ण लगेगा क्युकी उसकी पूर्णता दर्शाने के लिए शब्द ही कम पड़ जाते है! इस संसार में माँ का आँचल जिसे मिल जाये जिसे उसके आँचल की पनाह मिल जाये उसकी जिंदगी अपने आप में  ही सफल हो जाती है! हम माँ का गुणगान किन शब्दों  में करे वह  जीती भी हमारे लिए  और मरती भी हमारे लिए है! लोग कहते है कि जब  एक बच्चा औरत की कोख से जन्म लेता  तब वो औरत माँ बनती है! परन्तु लोगो के यह नहीं पता की जब उस औरत को पता लगता है  की वो गर्भवती है उसकी  कोख में एक बच्चा पल रहा है वह  तभी ही माँ बन जाती है! उस औरत का अल्हड़पन उसकी मौज मस्ती  रहन -सहन खान -पान और उसका सवभाव बदल जाता है! पहले वह अपने लिए खाती थी परन्तु अब वह अपने गर्भ में पल रहे बच्चे  के स्वास्थ्य के लिए  खाती है! कुय्की अब वह औरत माँ बनने जा रही है और यह पल उसकी ज़िदगी का सबसे हसीन पल है!  जिसके वह बस सपने संजोती थी आज उसका वह सपना पूर्ण होने जा  रहा है वह जो मस्त अल्हड़ अपने में  मग्ज़ रहने वाली औरत माँ