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पापा हमारे आदर्श, गुरु , भगवान्

पापा हमारे आदर्श  पापा बनने  एहसास  पापा स्वयं में हमारे लिए भगवान्  है क्युकी जिस तरह माँ को हम  भगवान का रूप मानते है उसी तरह पापा हमारे लिए भगवान है ! जब एक व्यक्ति को पता लगता  वह पिता बनने वाला है उसकी पत्नी की गर्भ में उसका बच्चा पल रहा है, उसी समय  से उस व्यक्ति को अपने पिता होने की जिम्मेदारियों का एहसास हो जाता है ! फिर वह अपनी जिंदगी जीने के बजाए उस  होने वाले बच्चे के लिए जीने लगता है ! उस व्यक्ति के दिमाग ने अब उस होने वाले बच्चे  के लिए एक अलग सा मोह दिया  है ! वह अब अपनी जिंदगी की मौज मस्ती को छोड़ कर अपने उस होने वाले बच्चे के future के बारे में सोच ने लगा है ! उसे  बहुत ख़ुशी है की वह पिता बनने वाला है और वह सोच रहा है की वह अपने बच्चे के सपने कैसे पुरे करेगा उसको किस स्कूल में पढ़ायेगा उसकी जिंदगी के लिए कौन सी पॉलिसी ठीक रहेगी उसे वह बड़ा होकर क्या बनाएगा जो वह अपनी जिंदगी में खुद हाशिल नहीं कर सका वह  सारी खुशियाँ अपने बच्चे को  देगा और भी बहुत कुछ उसके दिमाग में चलता है जबकि वह अभी तक पिता नहीं बना ! लेकिन जब उसका बच्चा इस दुनिया में आता है तो वह बहुत खुश होता है ले

दोस्ती की अहमियत

दोस्ती की अहमियत हम सबके जीवन में  दोस्ती हर व्यक्ति के जीवन का एक अह्म  हिस्सा है जिस प्रकार व्यक्ति के जीवन में उसकी फैमिली अहमियत रखती उसी तरह उसके जीवन में अच्छे दोस्त और उसकी दोस्ती अहमियत रखती है ! हम दोस्ती के बारे में अपने इतिहास से देखते आये है कि हर व्यक्ति के जीवन में कोई न कोई दोस्त जरूर होता है और हमने दोस्ती के ऊपर बहुत सारे किस्से भी सुने है ! दोस्ती में सबसे अच्छी  बात यह है की वह किसी धर्म जात - पात , रंग-भेद  , अमीरी -गरीबी या फिर किसी पुरुष या स्त्री को देख कर नहीं होती है ! आज कल हम सब धर्म को लेकर लड़ते रहते है सब कहते है की हमारा धर्म सबसे बड़ा है चाहे वह हिन्दू हो मुस्लिम हो सिख हो या फिर ईसाई हो ! लेकिन ये दोस्ती ही है जो सबको एकता में बांधे रखती है और उन्हें एह्साह दिलाती है की हम सब बराबर है चाहे हम किसी भी धर्म के है क्युकी हम सबको पता है जब हमे चोट लगेगी तो हमारा खून जरूर निकलेगा और ऐसे समय में हमारा परिवार और हमारे दोस्त ही हमारे काम आयेगे ! दोस्त हमेशा हमारा साथ देता है  हर  किसी  के बचपन  से लेकर बुढ़ापे  तक दोस्त होते इनमे से कुछ बचपन के दोस्त होते

हँसने के फ़ायदे (Benefit of Smiles)

हंसना एक व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए जरूरी  हँसना  हमारे स्वास्थ्य के लिए  बहुत लाभकारी और जरूरी है ! एक समय था जब इंसान बहुत हस्ते थे वो हमेशा खुलकर ठहाके मारकर हँसते थे क्युकी उस समय इंसान खुलकर जीना जानता था वो एक परिवार के साथ मिलजुलकर रहता था उस परिवार में माँ पापा, दादा दादी, ताऊ ताई , चाचा चाची और सबके बच्चे ! लकिन आजकल इंसान इतना व्यस्त हो गया की वह हँसना ही भूल  गया कुछ तो काम  के लिए दूसरे देश या फिर दूसरे राज्य में जा रहे उन्हें परिवार का मतलब ही नहीं पता और जो परिवार के साथ रहते है वो उन्हें समय ही नहीं देते क्युकी वह खुद में इतने उलझे रहते है कि वे सभी  हँसना  और परिवार सब कुछ भूल चुके है उन्हें तो ये भी नहीं पता की  आखिरी समय परिवार के साथ कब मस्ती की थी !  आज कल इंसान इतना व्यस्त और तनावपूर्ण जिंदगी जी रहा है कि उसकी हंसी कही गायब सी हो गयी है ! आज हमे हँसने के लिए भी बहाने ढूंढने पड़ते है लकिन हँसना तो हमारी जिंदगी का एक हिस्सा है हमने देखा की हंसने के लिए हम सब comedy show या कॉमेडी मूवी देखते है क्युकी हम ये  इसलिए देखते कि  हमारा मूड और माइंड ठीक  हो सके हम इतने व

Lockdown 4.0 - Guidelines by Govt.

Lockdown 4.0  के लिए केन्द्र सरकार के दिशा - निर्देश नीचे दिए गए है! 31 मई तक क्या बंद रहेगा? अंतरराष्ट्रीय और घरेलू यात्री उड़ानें बंद रहेंगी। मेट्रो रेल भी अभी शुरू नहीं होंगी। सिनेमा हॉल, शॉपिंग मॉल, जिम, स्वीमिंग पूल, एंटरटेनमेंट पार्क, थिएटर, ऑडिटोरियम, असेंबली हॉल बंद रहेंगे। स्कूल, कॉलेज, एजुकेशन, ट्रेनिंग, कोचिंग इंस्टिट्यूट भी 31 मई तक बंद रहेंगे। ऑनलाइन डिस्टेंस लर्निंग चलती रहेगी। होटल और बार बंद रहेंगे। हर तरह के राजनीतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक कार्यक्रमों और जमावड़ों पर रोक जारी रहेगी। 31 मई तक क्या खुला रहेगा? अगर राज्य सरकारों के बीच आपसी सहमति बन जाती है तो दो राज्यों के बीच यात्री बसों और गाड़ियों की आवाजाही हो सकेगी। सरकारें अपने स्तर पर फैसला कर राज्यों के अंदर भी बसें शुरू कर सकेंगी। स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और स्टेडियम खुल सकेंगे, लेकिन दर्शकों की इजाजत नहीं होगी। रेस्टोरेंट्स से आप सिर्फ होम डिलिवरी के लिए खाना मंगवा सकेंगे। होम डिलिवरी करने वाले रेस्टोरेंट्स को किचन शुरू करने की इजाजत दी गई है। सिर्फ वही होटल चालू रहेंगे, जहां

'माँ' - भगवान का रूप

माँ शब्द अपने अपने आप में  परिपूर्ण  'माँ' ये शब्द अपने आप में  ही पूर्ण है माँ  के  बारे में  आप कितना भी लिख लो  वो अपने आप  में अधूरा  और अपूर्ण लगेगा क्युकी उसकी पूर्णता दर्शाने के लिए शब्द ही कम पड़ जाते है! इस संसार में माँ का आँचल जिसे मिल जाये जिसे उसके आँचल की पनाह मिल जाये उसकी जिंदगी अपने आप में  ही सफल हो जाती है! हम माँ का गुणगान किन शब्दों  में करे वह  जीती भी हमारे लिए  और मरती भी हमारे लिए है! लोग कहते है कि जब  एक बच्चा औरत की कोख से जन्म लेता  तब वो औरत माँ बनती है! परन्तु लोगो के यह नहीं पता की जब उस औरत को पता लगता है  की वो गर्भवती है उसकी  कोख में एक बच्चा पल रहा है वह  तभी ही माँ बन जाती है! उस औरत का अल्हड़पन उसकी मौज मस्ती  रहन -सहन खान -पान और उसका सवभाव बदल जाता है! पहले वह अपने लिए खाती थी परन्तु अब वह अपने गर्भ में पल रहे बच्चे  के स्वास्थ्य के लिए  खाती है! कुय्की अब वह औरत माँ बनने जा रही है और यह पल उसकी ज़िदगी का सबसे हसीन पल है!  जिसके वह बस सपने संजोती थी आज उसका वह सपना पूर्ण होने जा  रहा है वह जो मस्त अल्हड़ अपने में  मग्ज़ रहने वाली औरत माँ 

BENEFIT OF READING

पढ़ना हमारे लिए जरूरी  पढ़ने के हमेशा से ही बहुत फायदे हुए है हम यहाँ स्कूल की पढाई की बात नहीं कर रहे है हम बात कर रहे है जो स्कूल और कॉलेज के बाद नौकरी या अपना कोई कारोबार करते है उनमे से कुछ लोगो को Newspaper , Magazine, Novels, Story Books, Blogs etc. हर दिन पढ़ना अच्छा लगता है जिन्हे एक बार पढ़ने की आदत लग जाये वो अपना समय निकल कर एक बार दिन या रात में जरूर पढ़ते है चाहे वो सब ऑफिस में कितने भी बिजी क्यों ना हो फिर भी वो सब पढ़ने  का समय निकल ही लेते है और कुछ लोग तो  पढ़ कर सोते है क्युकी जब तक वो सब पढगे नहीं जब तक उन्हें नींद नहीं है  और कुछ लोगो  को पढ़ना अच्छा नहीं लगता है और जिन्हे पढ़ना अच्छा नहीं लगता उनके पास ना पढ़ने के बहाने  होते है जैसे की उनके पास समय नहीं है  ऑफिस का बहुत काम है,  घर पर बहुत काम होता है, या और बहुत सारे  बहाने होते है न पढ़ने के लकिन उन सभी लोगो को ये नहीं पता की हर दिन पढ़ने के कितने फायदे होते है आज मै उन्हें यही बताने जा रहा की हर दिन पढ़ने के  कितने फायदे होते है! पढ़ने के फायदे  जानकारी बढ़ती है -   हर दिन एक बार पढ़ने से आपकी जानकारी बढ़ती है आपको नये नये श

माँ : व्यक्ति के जीवन की प्रथम गुरु

माँ की ममता  माँ एक ऐसा शब्द है जिसका अर्थ सीमित शब्दों में बांधना संभव नहीं है। माँ का दूसरा नाम ममता है, क्यूकी  माँ की ममता समुद्र से भी गहरी है, और   माँ एक वह सुखद अनुभूति है जो हमारे सारे दुःख, कष्टों को अपने ममता के आँचल से ढँक देती है। माँ शब्द की गहराई को परिभाषित करना सरल नहीं है क्यों की उसमे पूरा ब्रह्माण्ड का ज्ञान समाहित होता है। माँ का स्थान किसी भी व्यक्ति के जीवन में सर्वोच्च होता है। माँ न केवल बच्चे को जीवन प्रदान करके इस संसार में लाती है अपितु किसी भी व्यक्ति के जीवन की प्रथम गुरु कहलाती है। एक बच्चा इस संसार में आने पर अपनी माँ पर निर्भर हो जाता है, माँ बड़े स्नेह से उसका पालन पोषण करके उसे जीवन ज्ञान देने लगती है। यही कारण है की माँ को गुरु का स्थान प्राप्त है। माँ के अनेक रूप होते है, वह अपने सुखों का त्याग करके अपने बच्चों की देख भल करती है तथा उसको जीवन में हर सुख प्राप्त हो सके इसलिए दिन रात एक कर देती है। माँ एक सुखद अनुभूति है। वह एक शीतल आवरण है जो हमारे दुःख, तकलीफ की तपिश को ढँक देती है। उसका होना, हमें जीवन की हर लड़ाई को लड़ने की शक्ति देता रहता है