Skip to main content

Posts

Showing posts with the label poetry

Featured

मेरे प्रभु राम से अयोध्या फिर से जगमगाई है - Shree Ram Bhajan

जीवनसाथी हो ऐसा - राधा कृष्णा का प्यार है जैसा

जीवनसाथी हो ऐसा - राधा कृष्णा का प्यार है जैसा  जीवनसाथी नहीं पहली आस हो तुम  रिश्तो में नहीं विश्वाश में हो तुम।    प्यार भरे दिन की शुरुआत हो तुम  मेरे लिए हर पल खाश हो तुम।  मेरी जिंदगी की पहचान हो तुम   मुझको समझने मे लाजवाब  हो तुम।    मेरे सुख दुःख में शामिल हो तुम  मुझको हसाने में  माहिर हो तुम।  मेरे परिवार का पिल्लर हो तुम  मेरी जिंदगी की चाबी हो तुम।  चाय में अदरक जैसे  हो तुम  मेरी कड़क चाय हो तुम।     मैं रास्ता भटक जाऊ तो सही रास्ता दिखाओगे तुम मेरी हिम्मत बन साथ खड़े हो जाओगे तुम।  मैं कुछ समझ न पाऊं तो समझाओगे तुम  जिंदगी की भाषा सिखाओगे तुम।    मेरे लिए समाज से टकराओगे तुम  मेरे हर हालात में कदम से कदम मिलाओगे तुम।  मेरी खातिर किसी और को अपनाओगे नहीं तुम  गलती हो जाये तो माफ़ कर जाओगे तुम।    मेरी मोहब्बत का मजाक नहीं उड़ाओगे तुम  हम जैसे भी है वैसे ही हमे अपनाओगे तुम।    दिल की धड़कन बनजाओगे तुम  और उस धड़कन को धड़कना सिखाओगे तुम।   अब कैसे बताये ये तुम्हे  अपना ये रिश्ता है ऐसा   राधा और कृष्णा  के साथ जैसा।     जिस तरह राधा कृष्ण एक साथ है पूरे  उसी तरफ हम तुम्हारे बिन है अ

दिल से दिल तक सफर - दिल के टूटे ख्वाब

दिल से दिल तक सफर  - दिल के  टूटे ख्वाब  ये दिल भी तो बेचारा था  हर किसी को ये गवारा न  था  हर किसी का हाथ दिल ने  थामा था  हर किसी को अपना माना था  पर ये उन्हें रास न आना था।     हर किसी का ये दिल तोड़ कर जाना था  किसी ने अपने दोस्त का हाथ थामा था  तो किसी ने मेरे ही दोस्त को अपना माना था।   माँ मेरा अभिमान और मेरा स्वाभिमान  इस दिल ने उन सबको समझाना  था  पर उन सबने ही हमको गैर माना था।  उनके  जाने के बाद तो ये सिलसिला था  ये दिल खुद से खफा था और खुद से नाराज था।   इस दिल ने तो उन्हें  बेवफा का नाम दिया था   पर उनके दोस्तों से पता चला कि उन्होंने हमे बेवफा का नाम दे  डाला था।  नारी का क्या दोष - समाज के बेबस नारी  इस दुःख भरी राह में दोस्तों ने संभाला था  और घरवालों का सहारा था।  जब जब दिल को कुछ समझ आता था  उससे पहले चाहने वाला  बहुत दूर चला जाता था।  अब तो बस उस बेवफा को ये बताना था  तेरा पास आना मेरे लिए अच्छा था तेरा दूर चले जाना भी अच्छा था  शायद ऊपर वाले ने हमारा साथ ही इतना  लिखा था। गांव की सभ्यता  इस दिल  जिस जिस को दिल दिया  उसी ने मेरा साथ छोड़  दिया  और मुझे छोड़ कर किसी और क

माँ मेरा अभिमान है - माँ मेरा स्वाभिमान है

माँ मेरा अभिमान और मेरा स्वाभिमान   माँ को अपने शब्दों में बयान कर दू मैं वो नहीं  माँ के रूप को साकार कर दू मैं वो नहीं  माँ की मैं क्या तारीफ करूँ  मैं तो उनकी जूती की धूल भी नहीं।  मेरी खुशियों में जो खुश होती है वो मेरी माँ है  मेरे दुःख में जो साथ होती है वो  मेरी माँ  है  जिसका आशीर्वाद हमेशा साथ रहे वो  मेरी माँ  है  और बिन कहे सब समझ जाये वो  मेरी माँ  है।  नारी (स्त्री) का क्या दोष है - समाज के आगे विवश स्त्री (नारी) माँ  हैं  तो मेरा अभिमान है  माँ  हैं  तो मेरा स्वाभिमान है माँ  हैं  तो मेरा सम्मान है    माँ  है तो मेरा नाम है।  माँ  ही तो भगवान का रूप है  माँ  ही इस जगत का स्वरूप है  माँ  ही तो जननी का रूप है  और  माँ  ही तो सबसे सुन्दर  संसार का स्वरूप है।   माँ  की ऊँगली पकड़ कर चलना सीखा  माँ  के आँचल में पलना सीखा   अब इससे आगे क्या कहुँ मैं  माँ  तुझसे ही तो मैंने जीना सीखा ।  मेरा गांव है शहर से निराला    माँ  मैं सीधा साधा भोला भाला  माँ  तेरे लिए सबसे अच्छा हूँ  कितना भी बड़ा हो जाऊ मैं  माँ लेकिन  माँ  तेरे लिए तो मैं बच्चा हूँ ।  ऐ मेरे मालिक  

मेरा गांव है शहर से निराला - गांव की सभ्यता

लेखिका - पूजा डबास  मेरा गांव है शहर से निराला    तेरी बुराइयों को हर अख़बार कहता है,  और तू मेरे गांव को गवार कहता है।   ऐ शहर मुझे तेरी औकात पता है,  तू चुल्लू भर पानी को वाटर पार्क कहता है।   थक गया हर शख्स काम करते करते , तू इसे अमीरी का बाजार कहता है।  गांव चलो वक्त ही वक्त है सबके पास,  तेरी सारी फुरसत तेरा इतवार कहता है।   एक पिता और बेटी की कहानी  बड़े बड़े मसले हल करती है यहां पंचायते,  तू अंधी भ्र्ष्ट दलीलों को दरबार कहता है।  बैठ जाते है अपने पराये साथ बैलगाड़ी में , पूरा परिवार भी बैठ न पाए तू उसे कार कहता है।   अब बच्चे भी बड़ो का आदर भूल बैठे है , तू इस दौर को संस्कार कहता है।  गरीबी - एक तस्वीर में बयाँ होती हुई बच्चा जवान थैली और पाउडर का दूध पीकर होता है , मेरे गांव में भैंस और गाय का दूध पीकर जवान होता है।  तेरे यहां अंग्रेजी भाषा में बकबक करते है, और हम गांव की भाषा को समझते है।  जिन्दा है आज भी गांव में देश की संस्कृति,  तू भूल के सभ्यता खुद को तू शहर कहता है।    तू धूल से मुँह को ढकता है , हम आज भी मिटटी को सर माथे लगाते है।  तू किसान को ग्वार कहता है , और वही किसान अन

गरीबी - एक तस्वीर में बयाँ होती हुई - गरीबी की मज़बूरी

लेखक -योगिता जैन  गरीबी - एक तस्वीर में बयाँ होती हुई एक तस्वीर गरीब की जो बहू रंगो से कलाकार ने सजाई थी , उसे खरीद कर ही मैंने अपनी बैठक में लगवाई थी।  कितना विशाल ह्रदय था मेरा कितना पुण्य कमाया था, एक गरीब का दर्द समझने अपना आँशिया सजाया था।  बड़े और ऊँचे पदों पर ऐसे ही गरीबी को समझाया जाता है  सरकार तो नहीं बदल रही लेकिन हालात को चित्र से बताया जाता है।  हम क्या कर सकते है हमारे हाथ तो मज़बूरी से बंधे है  देश में भूख गरीबी और अशिक्षा से कितने जन पीड़ित पड़े है।    दिल की डोर मैं सम्पन हु तो थोड़ा सा ही दान करके बहुत खुश होता हूँ  क्या यह सही मार्ग है देश की उन्नति का आज यह प्रश्न रखता हूँ।  मुझे तो ये दान लेना और देना दोनों ही बात गलत लगती है  कर्म प्रधान यह देश है मेरा फिर क्यों यहां भीख पलती है।  मंदिर बनवाने से अच्छा कोई औधोगिक क्रांति देश में लाये  किसी गरीब का बच्चा अपने देश में भूखा मर न पाए।  तस्वीर बनाने वाले तेरे हाथ में एक नयी क्रांति दिख जाये  किसी गरीब की तस्वीर अब किसी के घर में भी ना नज़र आये।  Rolex watch  Republic day offer  only -3999/-  whatsapp only-8527860859   थोड़ी

थोड़ी ख़ुशी थोड़ा गम - ख़ुशी और गम का सफर

थोड़ी ख़ुशी थोड़ा गम - ख़ुशी और गम का सफर  कभी थोड़ी ख़ुशी, कभी थोड़ा गम  कभी थोड़ा ज्यादा , कभी थोड़ा कम  कभी इतनी करीबी कभी इतना सितम  कभी थोड़ा ज्यादा कभी थोड़ा कम... नौकरी करने वालो का जिंदगी का सफर - जब नौकरी मिलेगी तो क्या होगा बॉस की जी हुज़ूरी होगी (जिंदगी की बस यही रखो चाहत बॉस होना चाहिए मस्त) कभी सूर्य का बादलो से निकलना  कभी बादलो का जम के बरसना  कभी लहरों का किनारे को छूना  कभी छू कर वापिस गुजरना  यादो का आना और फिर बिखर जाना   किसी को भुला देना लेकिन फिर भी ख्वाबो में मिलना  किसी की जिंदगी में गूंज से आना  और बिना आहट चले जाना  देता है थोड़ी ख़ुशी थोड़ा गम  कभी थोड़ा ज्यादा कभी थोड़ा कम।  दिल की डोर - दिल का रिश्ता (प्यार, इश्क़ और मोहब्बत) कभी चलते चलते कदमो का ठहरना  कभी ठहरे कदमो का फिर से गति पकड़ना  कभी तो सब कुछ मुक्क्दर पे छोड़ देना  तो कभी हिम्मत की डोर मजबूती से जोड़ लेना  कभी जीवन को कठिन समझना  कभी इतना सरल की जैसे रात और प्रभात का मिलना  कभी आँसुओ का शोलो  पे तड़पना  कभी मुस्कराहट का खिलखिला के बिखरना  देता है  थोड़ी ख़ुशी थोड़ा गम   कभी थोड़ा ज्यादा कभी थोड़ा कम।  2021 नया साल सबके लिए

नौकरी करने वालो का जिंदगी का सफर - जब नौकरी मिलेगी तो क्या होगा बॉस की जी हुज़ूरी होगी (जिंदगी की बस यही रखो चाहत बॉस होना चाहिए मस्त)

नौकरी करने वालो का जिंदगी  का सफर  हर किसी को है नौकरी की चाहत  जिसको मिले जाये उसको राहत  जिसको न मिले उसको आफत  किसी को सरकारी नौकरी की है चाहत  किसी को  प्राइवेट नौकरी की है चाहत  लेकिन हर किसी को है नौकरी की चाहत।  आपने ये जरूर सुना होगा की नौकरी मिलेगी तो क्या होगा  बदन पर सूट होगा पैर में बूट होगा  बंगला होगा गाड़ी होगी सलाम के लिए नौकर - चाकर होंगे और हाथो में गोरी का हाथ होगा ।  स्कूल की मस्ती, यारो की महफ़िल, वो भी क्या दौर था पर ये वाला किसी ने नहीं सुना होगा  जब नौकरी मिलेगी तो क्या होगा  बॉस की हुज़ूरी होगी  हां जी की नौकरी होगी, ना जी का घर होगा और सर पर काम का भार भी होगा।   छोटे हमे सलाम करेंगे  और हम अपने से बड़ो को सलाम करेंगे  बॉस की एक कॉल पर हमे जाना होगा  उनके हर काम को हां करना होगा।  स्कूल के बाद की जिंदगी का फलसफा, स्कूल का दौर था यारो की महफ़िल थी वो भी क्या दौर था  एक छुट्टी के लिए भी तरसना होगा  हर काम के लिए उनकी मंजूरी का इंतजार करना होगा  उनकी हर बात को अच्छे से सुनना होगा  और छोटी सी गलती पर भी प्यारे प्यारे शब्दों को सुनना होगा।   छुट्टी के लिए बहाना बनाना हो

दिल की डोर - दिल का रिश्ता (प्यार, इश्क़ और मोहब्बत)

 लेखक - नविन मेहता  दिल की डोर - दिल का रिश्ता  दिल से बंधी है दिल की डोर  अपना रिश्ता हो न कमजोर  वादा है अपना होंगे न दूर  हो जाये कितना भी मजबूर ! निकले तो सफर अनजाने चले  तुम्हे जीवन का सार बनाने चले  बाँध के प्यारा सा बंधन तुमसे  जहाँ के रिश्ते  निभाने चले !   नए साल पर कविता - 2021 नया साल सबके लिए हो कुछ खास   तेरे आने से  जीवन में बहार आ गई  खिल गए मन के फूल जो थी मुरझा गयी  मैं अक्सर उलझ जाता था बातो में  अब तुम मेरी सारी गुत्थी सुलझा गयी ! खूबसूरती तेरी चाँद जैसी  थी अनजानी अब मेहमान जैसी  एकपल बिन तेरे अब रहा न जाये  तेरी अदा न जाने कैसा जादू चलाये ! तेरे लिए मैं कोई गीत गुनगुनाऊं हो पसंद तुम्हे वो कहानी सुनाऊ  कभी ना आए जो नींद तुम्हे  में अपनी बाहों ले तुझे सुलाऊ ! स्कूल की मस्ती, यारो की महफ़िल, वो भी क्या दौर था तुम्हारी खामोशी पर मैं खामोश हो जाऊ  तुम रूठो कभी तो मैं प्यार से तुम्हे मनाऊ  तुम नादान सी मेरी कुछ मत सुनना  फिर तुझे गले लगाकर मैं तुझे समझाऊ ! तुम गुजरोगी जिस रास्ते से मैं फूल बिझाऊगा  मीठी मीठी बातो से तेरा दिल बहलाऊंगा  कोशिस ऐसी के कभी आँखों में आंसू न आए

2021 नया साल सबके लिए हो कुछ खास - नए साल पर कविता (इस साल कुछ खा सकरके दिखाते है इस दुनिया को नया इतिहास रच कर दिखाते है)

नए साल पर कविता - 2021 नया साल सबके लिए हो कुछ खास  देखो आ गया नया साल  इसे कहते है 2021 का साल  क्योकि 2020 में सबका हुआ था बुरा हाल  सब लोग हुए थे बेहाल  बहुत से लोगो के थे खराब हाल  कुछ लोग थे खुशाल  लेकिन अब  आ गया नया साल  इसे कहते है हम 2021 का साल।    इस  साल से बहुत से लोग लगाए बैठे है आस  ये साल बन जाये उनके लिए खास  किसी को नौकरी की तलाश  किसी को है घर की तलाश  सबको है बस यही विश्वाश   कोरोना का होगा  विनाश।  इशक है तो  ज़ाहिर कर - इश्क़ के मीठे बोल    इस साल कुछ खाश करके दिखाते है  इस दुनिया को नया इतिहास रच कर दिखाते है  सबको एकता का पाठ पढ़ाते है  चलो अपने देश को आगे बढ़ाते है  जात पात ऊंच नीच से सबको दूर ले चलते है  इंसान को इंसानियत का मतलब समझाते है  चलो सब मिलकर 2021 को खाश बनाते है।    दिल से दिल के रिश्ते निभाते है  अपनों को अपनापन दिखाते है  सब गिले शिकवे भूल जाते है  अपनों से अपना रिश्ता निभाते है  हर किसी को उनका हक़ दिलवाते है।  मातृभूमि को सर माथे लगाते  है  जवानो को नए साल पर कुछ तोहफे भिजवाते है  हम सब उनकी परवाह करते है  ये एहसास उन्हें दिलाते है चलो सब मिलकर 2021

इश्क है तो जाहिर कर , इश्क़ के मीठे बोल, इश्क़

इश्क़ के मीठे बोल इश्क है तो जाहिर कर बना कर चाय हाजिर कर  अदरक डाल या डाल इलायची  कूट कर मोहब्बत भी शामिल कर।  इश्क़ है तो जाहिर कर  जिंदगी बहुत छोटी है  इसे ऐसे बर्बाद मत कर  जो भी दिल में है उसका इजहार कर।    इश्क है तो जाहिर कर   अपनी मोहब्बत में मेरा नाम शामिल कर इश्क के इंतिहा को तू पास कर  घर वालो से मेरे बारे में बात कर।  इश्क़ है तो जाहिर कर  सोच कर समय बर्बाद मत कर प्यार कर इक़रार कर  दुनिया के सामने मुझे अपनाकर  अपने प्यार का नाम सरे आम कर।   इश्क़ है तो जाहिर कर  पहले तू पढाई कर  घर वालो का रोशन नाम कर  फिर घर आ कर, मेरा हाथ थाम कर  मेरे घर वालो को शादी के लिए राजी कर।    इश्क़ है तो जाहिर कर अपने रिश्ते पर भरोसा कर बना कर चाय हाजिर कर अदरक डाल या डाल इलायची  कूट कर मोहब्बत भी शामिल कर।    क्रिकेट की खबरे  स्कूल के बाद की जिंदगी का फलसफा, स्कूल का दौर था यारो की महफ़िल थी वो भी क्या दौर था  स्कूल की मस्ती, यारो की महफ़िल, वो भी क्या दौर था कहानियाँ    मेरे प्यारे दोस्तों मैं उम्मीद करता हूँ आपको यह कविता अच्छी लगी होगी , कृपया इसे शेयर करे अगर आपको पसंद आयी हो तो , और अगर आपक