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क्या भगवान हमें बिन मांगे सब दे देते है - Does God Help Us

क्या भगवान हमें बिन मांगे सब दे देते है  सब कहते है की भगवान् से कुछ मत मांगो वह बिन मांगे ही दे देते है लेकिन भगवान् को ये बताना पड़ता है की हमें क्या चाहिए।  भगवान् सुनते तो सब की है और सबको फल भी देते है किसी को समय से पहले मिल जाता है और किसी अंत में।  लेकिन हम यह बात इसलिए कह रहे है की हमें भगवन  से मांगना क्यों जरुरी है।  हम सब जानते है की हमारे मन में अनेक  इच्छाएं जागरूक रहती है और थोड़ी थोड़ी देर में हमारी इच्छाएं बदल जाती है।  और इन इच्छाओ को काबू कर पाना हमारे हाथ में थोड़ी न है।  क्योकि हमें बनाया ही ऐसा गया है की हम इच्छाएं करते रहते है और समय समय पर वह इच्छाएं बदल भी जाती है।  अब जब भगवान को हम सबको फल देना होगा तो उन्हें यह कैसे पता लगेगा की हमारे मन में कौन सी इच्छा चल रही है।  क्योकि भगवन जानते तो सब है लेकिन वो  भी तो चाहते है  की मेरा भक्त मुझसे कुछ मांगे कही मैंने बिना मांगे दे दिया और उसे  वह अच्छा न लगा तो। और हमारी इच्छाएं ही इतनी है की भगवान भी हमारी इच्छाओ को देख कर भ्रमित हो जाते है। आपने टीवी पर देखा होगा और पुराणों में पढ़ा भी होगा जब ऋषि मुनि सालो साल तप किया कर

राधा कृष्ण जैसा प्रेम कोई समझ न पाया है

राधा कृष्ण जैसा प्रेम कोई समझ न पाया है    राधा कृष्णा जैसा प्रेम कोई समझ न पाया है  यहां तो सिर्फ हवस में ही प्रेम समाया है इस कलयुग की माया कोई समझ न पाया है।  यहां राम और लक्ष्मण भाइयो जैसा प्यार कोई समझ नहीं पाया है  जायदाद के लिए भाई ने ही भाई का खून बहाया है  श्रवण के भाव माता पिता के लिए कोई नहीं समझ पाया है  आज कल तो माता पिता को बेटा ही आश्रम में छोड़ कर आया है  हरीशचंद्र जैसा सत्यवादी कोई नहीं कहलाया है  आज कल तो सबने झूठ को ही अपनाया है  एक समय पर कुनबा ही परिवार कहलाया है  आज कल तो माता  पिता से अलग होकर ही परिवार भाया  है  सीता माता  जैसी स्त्री ने पति धर्म निभाया है  आज कल की स्त्रियों ने तलाक लेकर पति से छुटकारा पाया है  भगत सिंह जी ने  शहीद होकर  आज़ादी का मतलब  समझाया है  पर आज कल की राजनीती ने हमे फिर से गुलाम  बनाया है रानी लक्ष्मीबाई ने महिलाओ को लड़ना सिखाया है  आज उसी सीख से महिलाओ ने देश में अपना सम्मान बढ़ाया है  एक समय  राजाओ ने आपस में लड़कर देश को गुलाम बनवाया है  और आज राजनीती ने जनता को अपना गुलाम बनाया है  इस कलयुग की माया कोई समझ न पाया है।  उम्मीद करता हूँ आप

Arrange Marriage

Arrange Marriage  जिन्हे हम जानते भी नहीं थे  उन्हें अपना जीवन साथी बनाया है हमने  इस रिश्ते को दिल से अपनाया है हमने  परिवार की ख़ुशी में खुद को ढाला है हमने  जब ही तो इस Arranged Marriage दिल से निभाया है हमने  उस अजनबी के साथ जीवन भर रहने की कशम खाई है हमने   बचपन से जिन माता पिता के साथ रहे एक झटके में ही उनसे दूर हो गए  देखते ही देखते उनके घर भी एक माता पिता और बन गए  कोई उन्हें सास ससुर कहता है  उन्हें माता पिता के रूप में अपनाया है हमने  कुछ महीने तो जी नहीं लगता है  मन करता है यहाँ से भाग जाऊं  अपने बचपन के माता पिता के पास लौट जाऊ  फिर इस दिल को संभालना पड़ता है  आंसूं बहाकर खुद को रोकना  पड़ता है  माँ के कहने पर हर रिश्ते को गहराई से जाना है हमने  इस सफर में हमसफ़र अच्छा मिल जाए तो  सारे गीले सिकवे मिट जाते है  हर कठिन सफर को सरलता से पार कर लेते है  क्योकि उस हमसर ने कभी गले लगा कर समझाया हमें  कभी गोदी में लिटाकर इन अश्को को हटाया  है उसने  तो कभी अपने माता पिता के सामने हमको पलकों पर बिठाया है उसने   इस तरह  यह ज़िन्दगी अच्छी कट जाती है  बस खुद को समझाना पड़ता  है  कुछ गलत फैसले

राजनीति का कोई न होता धर्म — भारत की बेटी की इज्जत शर्मशार होती हुई

राजनीति का कोई न होता धर्म   राजनीति का कोई न होता धर्म  ये कभी नही करते अपने कर्म  लोगो के लिए न है इनमे कोई शर्म कसम खाते है देश के लिए  और इस देश की नही है इन्हे फिक्र  कभी मरते है देश के जवान  कभी सड़क पर उतर आते है किसान और इस बार तो हो गई है हद एक लड़की की इज्जत की निकाली सरेआम परेड   न आई किसी को शर्म ना आई किसी को लज्जा शर्मसार हो गई भारत की बेटी की लज्जा यह सब देखकर कांप उठती इंसान की रूह इस खबर को नहीं दिखाता है कोई बस न्यूज में चलता है सीमा हैदर और ज्योति मौर्य की खबर यहां लव जिहाद के उठते है मुद्दे पर एक बेटी के लिए नहीं आती कोई खबर जागो भाईयो जागो अब इंसानियत के लिए जागो सरकार कोई भी हो हक हमारा है अपनी आवाज उठाने के लिए अधिकार हमारा है न किसी के आगे झुकेंगे न किसी के आगे टेके घुटने हम सब मिलकर सरकार से मांगे जवाब  आओ करे राजनीति का हिसाब  बेटियो को दिलाए इंसाफ  एक भारत का करे निर्माण  सब रहे सुरक्षित सबको मिले इंसाफ और सबका हो विकास । धन्यवाद  आपका नवी

PEOPLE WHO KEEP THINKING ALL THE TIME - जो व्यक्ति हर समय सोचते रहते है वह एक बारे जरूर पढ़े

जो व्यक्ति हर समय सोचते रहते है  वह एक बारे जरूर पढ़े  एक बार चीन के हिस्से में बहुत बड़ा  मठ था उस मठ में लगभग 500 भिक्षु रहते थे।  वह सब अपने गुरु के मार्गदर्शन में खुद को पहचानने का प्रयास कर रहे थे।  एक दिन एक लड़का उस मठ में शिष्य बनने के लिए आया उसे गुरु से मुलाकात की और गुरु से कहा की मैं खुद जानना चाहता हूँ ,  मैं सच की तलाश कर रहा हूँ और मैं जानना चाहता हूँ की सच क्या होता है  गुरु ने उस लड़के के तरफ देखा और कहा की तुम सच जानना चाहते हो तो तुम्हे अपना पूरा जीवन दांव पर लगाना होगा और फिर भी यह नहीं कहा जा सकता की इस जीवनकाल में तुम सच का पता लगा सकते हो या नहीं।  गुरु ने कहा की क्या तुम इसके लिए त्यार हो , यह सुनकर उस शिष्य ने कहा की गुरु जी मैं यहाँ पीछे मुड़ने के लिए नहीं आया हूँ।  मैं इसके लिए त्यार हूँ तो गुरु ने कहा अगर ऐसा है तो एक काम करो इस मठ में पांच सो भिक्षु है तुम उनके लिए चावल कूटने का काम करो तुम सुबह से लेकर शाम तक चावल कूटने का काम करते रहो और जब तुम थक जाओ तो तुम सोने चले जाओ और फिर उठ कर तुम चावल कूटने का काम शुरू कर दो इस तरह तुम हर सुबह बस यही काम करते रहो इसके

पहले माँ के सामने सर झुकाओगे या फिर भगवान् के सामने (Mother or God)

अगर आपसे पूछा जाये की सबसे  पहले माँ के  सामने सर झुकाओगे या फिर भगवान्   के सामने  आप सबसे पहले अपनी माँ के सामने सर झुकाओगे क्योकि माँ ही तो आपकी पहली गुरु होती है और माँ ही तो आपकी जन्मदाता होती है आपके जन्म लेने के बाद आपको सब कुछ तो माँ ही सिखाती है कि चलना कैसे है खाना कैसे है और रहना कैसे है और भगवन कौन है अगर माँ ही आपको नहीं सिखाती और बताती  की भगवान कौन है तो आपको कैसे पता लगता है की भगवन कौन है।  आपके लिए सबसे पहले आपकी माँ ही भगवान का रूप है और आप इस बात को झुठला नहीं सकते है।  और न ही इस बात का भगवान इंकार कर सकते है।  क्योकि भगवान ने ही तो माँ को सबसे पहले ये दर्जा दिया है।    माँ से इतना प्यार क्यों करते है सब  ऊपर दिए बातो से हमें ये एहसास हो  गया है की माँ ही हमारी जन्मदाता है और हमें  हमारी जीवनशैली में हमारी माँ ही हमें सब कुछ सिखाती है वो हमेशा हमारी फ़िक्र करती है बचपन से लेकर जवानी तक एक माँ ही तो है जो हमारी फ़िक्र करना नहीं छोड़ सकती है। माँ ही तो हमें पापा की पिटाई से बचाती है।  माँ के लिए तो हम जितने अलफ़ाज़ लिखे वह भी कम पड़  जाते है। एक माँ ही तो है जो हमें देख कर

Rooted - boy and discrimination Girl(अंतर् - लड़का और लड़की में भेदभाव )

अंतर् - लड़का और लड़की में भेदभाव  एक छोटा  परिवार शहर में रहता था।  घर का मुखिया अमित एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर की पोस्ट पर था और उनकी पत्नी  सीमा हाउस वाइफ थी।  उनके दो बच्चे राहुल और रानी थी।  दोनों बच्चो में एक साल का अंतर था।अमित के माता पिता गाँव में रहते थे। एक दिन अमित के माता पिता गांव से शहर बच्चो से मिलने आये।   जिद्दी बच्चे  की कहानी - एक माता पिता अपने ज़िद्दी बच्चे को कैसे सुधारे  अमित उन्हें लेने रेलवे स्टेशन पर गया और आधे घंटे बाद उनकी रेल आ गयी अमित ने उनका  समान लिया और उन्हें गाड़ी में बिठा घर की तरफ चल दिया। गाड़ी में बैठते ही अमित के माता पिता ने कहा की हमारा पोता कैसा है।  अमित ने कहा की आप घर ही चल रहे हो मिल लेना।  और फिर अमित ने कहा की आपको रेल में कोई परेशानी तो नहीं हुई। अमित के माँ ने कहा की नहीं हम तो आराम से आये है और तेरे लिए और पोते के लिए अचार भी लाये है, पर तेरे पिता जी रस्ते में सोये ही नहीं उन्हें डर था की कोई समान चुरा न ले जाए और ये कह कर अमित और उसकी माता हंसने लगी।  अमित के पिता ने कहा की तुम दोनों मिलते ही मेरी खिचाई करने लग जाते हो।  और पूछा की म