Skip to main content

जिद्दी बच्चे की कहानी - how to explain to a stubborn child

एक जिद्दी बच्चे को कैसे समझाये और सुधारे 



एक छोटा ज़िद्दी बच्चा था जिसका नाम राहुल था।  उसे बाहर का खाना खाने की आदत थी जैसे पिज़्ज़ा, बर्गर, चिप्स, पेटीज , कोल्ड्रिंग इत्यादि।  उसके माता और पिता इस बात से बहुत परेशान थे।  उन्होंने उसे समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन राहुल उनकी बात नहीं सुनता था और ज़िद करता या फिर रोने लग जाता था। एक दिन राहुल स्कूल से आया और मम्मी को घर आकर बोला की मम्मी बहुत तेज भूक लगी है कुछ खाने को दे दो। 



मम्मी: ने कहा की ठीक है बेटा मैं पोहा बना देती हूँ। 

राहुल : नहीं मुझे पोहा नहीं खाना मुझे बर्गर और कोल्ड्रिंग चाहिए। 

मम्मी : घर में फल रखे है वो खा ले , केले और सेब है 

राहुल : नहीं मुझे तो कोल्ड्रिंग और मेग्गी या बर्गर  चाहिए। 

मम्मी : उसकी ज़िद के आगे झुक गयी और कहा ठीक है कोल्ड्रिंग लिया मैं मैग्गी बना देती हूँ। 

राहुल : बहुत खुश हुआ और कोल्ड्रिंग ले आया और उसने मेग्गी और कोल्ड्रिंग लिया। 

उस दिन रात को राहुल की मम्मी ने पराठा और पनीर की  सब्जी बनाई। राहुल के पापा और मम्मी खाने के लिए साथ आकर बैठे।  

राहुल :  मुझे भूख नहीं है आप खा लो ये खाना। 

पापा : क्यों बेटा क्या खाया था जो  तुझे भूख नहीं है। 

राहुल : बस पापा मन नहीं कर रहा है। 

मम्मी : ये पराठा देख कर मना कर रहा है। 

पापा : चल खा ले बेटा एक पराठा तो खा ले। 

राहुल : नहीं पापा मैं बाद में खा लूंगा। 

पापा : ठीक है खा लेना थोड़ी देर में नहीं तो देख लेना। 

राहुल : डर के उसने थोड़ी देर में पराठा और सब्जी को पास रखे गमले में डाल दिया जिससे पापा गुस्सा ना करे। 

Benefit of Readings

अगले दिन जब राहुल स्कूल जाने लगा तो माँ ने कहा बेटा दूध पी लो। राहुल ने गिलास का दूध लिया और एक घुट पी कर चुपके से खिड़की से नीचे गिरा दिया। और स्कूल चला गया। 

मम्मी सफाई कर रही थी तो उन्होंने गमले में पराठा और पनीर की सब्जी देखी और राहुल के पापा को आवाज़ लगाई की देखो राहुल ने रात का खाना नहीं खाया है।  राहुल के पापा बोले उसने दूध भी नहीं पिया खिड़की से निचे फेंक दिया। 

राहुल की इस हरकत से वो दोनों बहुत परेशान थे।  वो सोच रहे थे की कैसा राहुल को समझाये।  उन्हें कुछ भी समझ नहीं आ रहा था।  राहुल को घर के खाने की आदत कैसे डाले।  उन दोनों ने सोचा की हमे स्कूल में जाकर राहुल की अध्यापक से बात करनी चाहिए 

वह उसी दिन राहुल के स्कूल में गए।  उन्होंने राहुल की अध्यापक से बात की।  अध्यापक ने पूछा क्या हुआ।  तो राहुल के पापा ने बतया की ऐसे बात है राहुल घर का कुछ भी खाना नहीं खाता है और जिद्द करता है रोने लग जाता है।  पढ़ाई में भी उसका मन नहीं लगता।  

अध्यापक ने यह सुन कर कहा की अब समझ आ रहा है की वह क्लास में ऐसी हरकत क्यों करता है और चिड़चिड़ा रहता है , अच्छे से पढ़ाई भी नहीं करता है।  अध्यापिका ने राहुल के मम्मी पापा को एक सुझाव दिया और कहा की ऐसा करके देखते है। 

Books - Our best Companion   👈

एक हफ्ते बाद राहुल का जन्मदिन था , उस दिन उसके दोस्त और अध्यपिका भी आयी थी।  उस दिन राहुल को पूरी छूट थी बाहर का खाना खाने की।  उस दिन घर में चिप्स कोल्ड्रिंग्स पिज़्ज़ा इत्यादि आया हुआ था।  बच्चो ने खूब मजे करे और जब सब बच्चे चले गए तब 

अध्यापिया : ये लो राहुल मेरी तरफ से तुम्हारे लिए गिफ्ट पर इसे बहुत संभाल कर रखना होगा। 

राहुल : ऐसा क्या गिफ्ट है मैडम जो ध्यान से रखना है। 

अध्यापिका : एक प्यारा सा पौधा दिया और कहा की इसका ख्याल रखना है तुम्हे राहुल। 

राहुल : यह पौधा तो बहुत प्यारा है , उसने अध्यापिका को धन्यवाद दिया और कहा की मैं इसका ख्याल रखूंगा। 

अगले दिन राहुल ने अपनी मम्मी को कहा की मम्मी इस पौधे में पानी डाल दू।  मम्मी ने कहा नहीं बीटा इसमें कोल्ड्रिंग डालो। 

राहुल : मम्मी पौधे में तो पानी डालते है। 

मम्मी : नहीं बेटा तुम इसमें कोल्ड्रिंग डालो , तुम्हे कोल्ड्रिंग पसंद है तो इसे भी पसंद आएगी। 

राहुल : कुछ समझ नहीं पाया और उसने मम्मी की बात सुनकर उसमे कोल्ड्रिंग डालनी चालू कर दी। 

माँ मेरा अभिमान - माँ मेरा स्वाभिमान 

कुछ दिन बाद वह पौधा सूखने लगा राहुल ने मम्मी को बोला 

राहुल : यह पौधा देखो कैसा हो  गया है। 

मम्मी : बेटा अपने पापा से पूछो। 

राहुल : पापा देखो ये पौधा कैसा हो गया। 

पापा : बेटा इसे खाद की जरूरत है। 

राहुल : पापा खाद कहा से मिलेगी। 

पापा : बेटा जो चिप्स और बर्गर, पिज़्ज़ा तुम खाते हो वही तो खाद है। 

राहुल : पापा सच में। 

पापा : हां बेटा 

राहुल ने उसी दिन से उसमे चिप्स का चुरा बना कर और एक बर्गर ला कर पौधे में डाला। लेकिन वह पौधा और खराब होता जा रहा था। 

राहुल शाम को कमरे में परेशान बैठे हुआ था।  उसके मम्मी पापा उसके पास गए और बोले क्या हुआ बेटा। 

मेरा गांव शहर से निराला - गांव की सभ्यता 

राहुल : पापा देखो न इस पौधे को कैसा हो गया है। 

पापा : बेटा अगर हम पानी की जगह इस पौधे को कोल्ड्रिंग और खाद की जगह चिप्स देंगे तो यह ऐसा ही होगा। 

राहुल : पर मम्मी और आपने तो यही बोला था मुझे। 

पापा : इस पौधे में साफ़ पानी और अलग से खाद डाला जाता जिससे यह मजबूत और अच्छा खिलेगा। 

राहुल कुछ समझ नहीं पा रहा था। 

राहुल के पापा ने राहुल एक वैसा ही नया पौधा लाके दिया।  और बोले की अब इसको अच्छे से पानी और खाद देना। 

राहुल ने कहा ठीक है पापा और राहुल उस पौधे में हर दिन पानी देने लगा और हफ्ते में खाद डालने लगा। 

राहुल बहुत खुश था और मम्मी पापा को बोल रहा था देखो पापा की मेरा ये वाला पौधा कैसे बढ़ रहा है। 

यह देख कर पापा बोले देखा बेटा जिस प्रकार इस पौधे को पानी और खाद मिला उसी प्रकार हमारा भी शरीर है। अगर हम इस पौधे की तरह सही तरह से खाना खायेगे तो हम भी अच्छे से बढ़ेंगे और स्वस्थ रहेंगे। 

राहुल बोला की पापा मैं आपकी बात समझ रहा हूँ और अब आगे से मैं घर का ही खाना खाऊंगा और दूध भी पियुगा। 

राहुल के पापा कुछ दिन बाद राहुल की अध्यपिका से मिलने गए।  और दोनों ने अध्यापिका को धन्यवाद दिया।  और पूछा की अब राहुल की पढ़ाई कैसी चल रही है।  

अध्यपिका ने कहा की अब राहुल क्लास में मन लगाकर पढ़ता है और मस्ती भी करता है , और अपने दोस्तों को बाहर का खाना खाने से भी रोकता है।  

आपको ये छोटी सी कहानी कैसी लगी , आप इस कहानी से अपने बच्चो को समझा और सुधार भी सकते है। आपके मन इस प्रकार के और भी आईडिया आ सकते है।  अगर आपके मन में कुछ अच्छा आईडिया आये तो हमसे शेयर करे हमारी mail id npcoolguy1@gmail.com। हम आपके आईडिया को कहानी के रूप में आपके अपने ब्लॉग www.idealjaat.com पर पोस्ट करेंगे। 

Poetry  (कविता)

कहानियां short stories 

Thoughts (विचार)

धन्यवाद 

आपका नवी  

 

 

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

संघर्ष ही जीवन है

 संघर्ष ही जीवन है  संघर्ष (struggle) ये अक्षर दिखने में छोटा सा है , परन्तु यह जीवन का हिस्सा है या समझ लीजिये की संघर्ष का नाम ही जीवन है , मनुष्य  या फिर पशु पक्षी हर किसी  का जीवन एक संघर्ष है | अगर हम सरल शब्दों में संघर्ष को परिभाषित करे तो हम सब संघर्ष से घिरे हुए और जो सफलता या  सीख मिलती है वो संघर्ष की ही देन है |  संघर्ष जीवन को निखारता, संवारता  व तराशता  हैं और गढ़कर ऐसा बना देता  हैं, जिसकी प्रशंसा करते जबान थकती नहीं। संघर्ष हमें जीवन का अनुभव कराता  हैं, सतत सक्रिय बनाता  हैं और हमें जीना सिखाता  हैं। संघर्ष का दामन थामकर न केवल हम आगे बढ़ते हैं, बल्कि जीवन जीने के सही अंदाज़ को – आनंद को अनुभव कर पाते हैं। SELFISH HUMANS - HOW TO DEAL WITH SELFISH HUMANS ? संघर्ष सफलता की कुंजी संघर्ष जीवन का वह मूलमंत्र है जिसका अनुभव हर कोई व्यक्ति करता  है और संसार में बहुत ही कम व्यक्ति होंगे जो इसका  अनुभव पाने से वंचित रहे  हो , समाज में हर कोई नाम, शोहरत, पैसा , इज्जत कमाना या फिर पढ़ाई में अव्वल होना  चाहे जो भी लक्ष्य हो वह बिना संघर्ष  के अधूरा है! संघर्ष जीवन में उतार - चढ़ाव का

प्यार करने वालो की प्यारी सी कहानी - अगर प्यार सच्चा हो तो किस्मत उन्हें मिला ही देती है

प्यार करने वालो की प्यारी सी कहानी  किसी  ने सच ही कहा है अगर आप किसी को सच्चे दि ल से चाहो तो कायनात भी उसे आपसे मिलाने में  जुट जाती है। और अगर किस्मत भी साथ दे दे तो वो आपको जरूर मिल जाता है।   यह कहानी कुछ ऐसी ही है जिसमे दो प्यार करने  वाले एक दूसरे से जुदा होने के बाद भी मिल जाते है।  यह कहानी और कहानियो की तरह नहीं है।  इस कहानी में किस्मत दो प्यार करने वालो को फिर से मिलाती  है।  और उन दोनों को भी नहीं पता था  कि वो दोनों जिंदगी में दुबारे मिल पाएंगे।  चलो अब हम कहानी की शुरआत करते है इस कहानी को पूरा पढ़ना जब ही आपको समझ आएगा की प्यार  किसे कहते और उसका पास होने का और जुड़ा होने का एहसास कैसा होता है।  राज और काजल दिल्ली के एक ही कॉलेज में पढ़ते है, दोनों की कॉलेज में दोस्ती हो जाती है।  और धीरे धीरे दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगते है।  राज और काजल एक दूसरे को अच्छे से समझने लगते है , और  उन दोनों का समय के साथ साथ दोस्ती और  प्यार बढ़ता जाता है। कॉलेज का आखिरी पड़ाव था और दोनों अब एक दूसरे से अलग हो रहे थे दोनों बेचैन थे की आगे वो मिल पाएंगे या नहीं उनकी जिंदगी उन्हें किस मोड़ पर

छोटी कहानी बड़ी सीख

  छोटी कहानी बड़ी सीख  🖊 लेखक नविन  एकबार एक चोर ने कसम खाई के जिंदगी में मैं कभी झूठ नहीं बोलूंगा।  परन्तु पेशे से वो तो चोर था।  और आप सब जानते है की झूठ तो चोर का सबसे महत्वपूर्ण हथियार होता है।   एकदिन वो अपनी तीन चार गधो पर समान के गट्ठर रखे हुए जा रहा था रास्ते में पुलिस चेक पोस्ट पड़ी उसके पास एक दरोगा आया और पूछा। की तुम कोन हो और क्या करते हो। सामने से जवाब मिला नसरुद्दीन हूँ  और चोरी करता हूँ।  दरोगा हैरान हो गया उसने सरे गट्ठर खुलवाए और चेक किया ज्यादा कुछ मिला नहीं सिवाय कुछ लकड़ियों के।  उसने नसरुद्दीन को जाने दिया।  कुछ दिनों बाद नसरुद्दीन फिर वही चेक पोस्ट पार कर रहा था।  फिर वही दरोगा मिला और पूछा अब भी चोरी करते हो क्या ? नसरुद्दीन ने कहा हां चोर हूँ तो चोरी ही करूंगा।  दरोगा ने फिर से सारा समान खुलवाया और चेक किया और फिर से कुछ नहीं मिला।  ये सिलसिला पुरे 20 सालो तक चलता रहा, वो दरोगा रिटायर हो गया लेकिन उसे यही एक बात खलती रही की चोर्ने समने से कुबूल किया के वो चोर है फिर भी वो कुछ बरामद नहीं क्र पाया चोरी साबित नहीं कर पाया।   Cricket Update एकदिन नसरुद्दीन दरोगा जी