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मेरे प्रभु राम से अयोध्या फिर से जगमगाई है - Shree Ram Bhajan

स्वार्थी मनुष्य - क्या हम सब स्वार्थी है

 स्वार्थी मनुष्य 



आज हम बात करेंगे स्वार्थी इंसान की। 

पहले हम स्वार्थ की परिभाषा को समझेंगे - स्वार्थ को हम खुदगर्ज भी कहते है ,  वह मनुष्य जो अपने फायदे या काम  के लिए किसी से बात करे और जब उसका काम निकल जाये तो वह किनारा कर ले और  फिर दुबारे काम होने पर उसे याद करे उसे हम सरल भाषा में स्वार्थ कहते है। स्वार्थी मनुष्य अपने काम और फायदे के किसी को नुक्सान भी पहुंचा सकता है। 

वैसे तो हम सब स्वार्थ का अलग अलग मतलब निकालते है। जैसे आप कभी  एक कक्षा या सभा में किसी से पूछेंगे तो आपको हर कोई स्वार्थ का अलग अलग मतलब बतायेगा।  लेकिन सब जवाब मिलते जुलते ही मिलेंगे क्योकि स्वार्थी मनुष्य अपने फायदे के लिए सब कुछ करता है। 

भगवान ने मनुष्य का स्वभाव जानवरो से अलग बना रखा है।  और मनुष्य अपने स्वभाव के हिसाब से ही चलता है।  जिस तरह मनुष्य की पांचो उंगलिया एक जैसी नहीं होती है उनकी इच्छाएं असीमित होती है (मनुष्य की इच्छाएं असीमित और अनंत )।  उसी प्रकार हर मनुष्य का स्वभाव एक जैसा नहीं होता है। क्योकि हम मनुष्य ऐसे ही होते है। 

एक मनुष्य  कभी खुद में कमी नहीं देखता लेकिन दूसरे में कमी बहुत जल्दी ढूंढ लेता है उसी तरह  एक मनुष्य अपने आपको स्वार्थी नहीं समझता लेकिन उसे दूसरे व्यक्ति हमेशा स्वार्थी लगते है। 

हम सबके अंदर स्वार्थ के कण है 

क्या आप सब जानते है की हम सब के अंदर स्वार्थ की कण है , लेकिन किसी में ज्यादा  या किसी में थोड़े कम है।  हां आप सब सही सोच रहे है की हर एक मनुष्य स्वार्थी है।  अब आप ये भी सोच रहे होंगे की मैं तो स्वार्थी नहीं हूँ या मैंने कभी ऐसा कोई काम नहीं किया कि मुझमे स्वार्थ झलके।  लेकिन मेरे प्यारे दोस्तों यहां इस संसार में हम सब मनुष्य स्वार्थी है।  

हो सकता है , की कुछ लोग मेरी  यह बात सुनकर सोच रहे होंगे की मैं तो बेकार की बात कर रहा हूँ , या फिर ऐसा कुछ नहीं होता या फिर मेरा दिमाग चल गया है, ऐसा कुछ आप सोच सकते है, क्योकि सोचने पर हम आप या हमारी सरकार हम पर कोई प्रतिबंद नहीं लगा सकती। और आज उसी सोच और विश्वाश के साथ मैं आपको सबको स्वार्थी बोल रहा हूँ। 

अगर आप सब स्वार्थ की परिभाषा समझ चुके है तो आपके लिए बहुत ही आसान होगा की स्वार्थ को कैसे समझे या हम समझ सकते है।  

मेरी माँ मेरा अभिमान और मेरा स्वाभिमान 

सरल भाषा में स्वार्थी मनुष्य को समझते  है। 

हम सबके परिवार , दोस्त , रिस्तेदार तो जरूर होंगे।  इन तीनो में से सभी की पास कुछ न कुछ तो जरूर है।  और आप सब परिवार, दोस्तों, रिश्तेदारों से बात भी करते है , हो सकता है किसी को परिवार की कुछ सदस्य पसंद नहीं है तो उनसे बात न करना चाहे या फिर किसी दोस्त से मजबूरी में बात करता हो , या फिर कुछ  रिश्तेदारो के  घर जाना पसंद न हो या फिर उनसे बात करना पसंद न हो, और बात भी करनी मज़बूरी हो जाती परिवार की वजह से।  ये सब हम सबके साथ होता है। 

अब आप जिन्हे पसंद नहीं करते या फिर किसी मज़बूरी में बात कर रहे है या फिर आपका कोई मतलब है जब आप उनसे बात कर  रहे है। यही आपके अंदर का स्वार्थ है।  अब आप कहोगे वो तो हमे अच्छे नहीं लगते या फिर वो बुरे है , इसलिए हमे उनसे बात करना पसंद नहीं है।  चलो हमने आपकी ये बात मान ली।  लेकिन अगर आप किसी वजह से उनसे बात कर रह है तो आपका स्वार्थ आपसे बात करवाता है। 

माता-पिता के प्रति स्वार्थ और निस्वार्थ 

माता-पिता ने हमे  जन्म दिया और उन्होंने हमे जैसे संस्कार दिए , जो कुछ भी हमे समझाया सिखाया यह उनका फर्ज था , लेकिन जैसे- जैसे हम बड़े हुए हमने खुद के फैसले लेने लगे।  तब से हमारे अंदर का स्वार्थ जागने लगा। देखो माता पिता के साथ हम रहते है , क्योकि उन्होंने हमे जन्म दिया सही गलत का फर्क समझाया फिर भी हम उनकी हर बात से सहमत नहीं हुए , और एक दिन कुछ मनुष्य तो अपने माता पिता को घर से निकल देते है या फिर उनसे ऐसे बात करते है की वो उनके माता पिता ही नहीं है।  ये सब आपका स्वार्थ करवाता है। सोचो आपने माता पिता को घर से निकल दिया है पर उन्होंने आपका क्या बिगाड़ा था, फिर भी अपने उन्हें घर से निकाल दिया क्योकि या तो अपने किसी के कहने पर ये सब किया, अगर आपने किसी के कहने पर किया तो आपने माता पिता से ज्यादा किसी और की बात सुनी इसका मतलब आपके स्वार्थ ने आपको अपने माता पिता से ज्यादा किसी और को आपका प्यारा  बना दिया है।      

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दोस्तों के लिए स्वार्थ 

हम सबके दोस्त समय समय पर बदलते रहते है मतलब पड़ोस के दोस्त अलग फिर स्कूल गए वो दोस्त अलग , फिर स्कूल को बदला वहां दोस्त अलग , फिर कॉलेज या किसी इंस्टिट्यूट गए वह के दोस्त अलग , फिर जॉब करने लगे वह के दोस्त अलग , फिर जॉब बदली तो वहां के दोस्त अलग।  आप सभी मेरी इस बात से सहमत जरूर होंगे। आपको पता इस दौरान हमारे बहुत सारे दोस्त बने लेकिन हम सभी से बात करते है , या फिर सभी के नंबर है।  आपके पास इसका जवाब नहीं होगा , क्योकि जैसे जैसे नए दोस्त बने आपको पुराने दोस्तों की जरूरत नहीं रही। आप सबको अब  नए  मिले इस वजह से।  लेकिन आपके एक दो बचपन के या फिर स्कूल के ऐसे दोस्त है जिनसे आप अभी भी बात  पता है ऐसा क्यों होता है।  आपके स्वार्थ की वजह से क्योकि आपको लगता है की यह अच्छा , या फिर कभी आपके काम आ सकता है।  आप कभी भी परेशान या दुखी होते है तो अपने खाश दोस्त को फ़ोन करते है और अपना दुःख सुनाते है , आपने सोचा की आपने इसी दोस्त को क्यों फ़ोन किया किसी और को क्यों नहीं , क्योकि आपको पता है कि यह आपकी सारी बात सुनेगा और आपको उसका सही जवाब भी देगा , यही तो आपका स्वार्थ ही की आपकी उससे इतनी अछि दोस्ती जो है।  

किसी नए साथी के प्रति स्वार्थ 

आप किसी लड़की या लड़के को दोस्त बनाते है , और उस दौरान आप अपने सबसे अच्छे दोस्त को नदरअंदाज करने लगते हो , जिस दोस्त से आप हर दिन मिलते थे अब उससे कभी  कभी मिलते हो , क्योकि आप जो नया साथी मिला है आपको उसके साथ समय बिताना  अच्छा लगता है , और यही आपका स्वार्थ करवाता है।  और जिस दिन आपकी उस नए साथी से लड़ाई या बातचीत बंद  आपको अपना वो दोस्त याद आ जाता है, ये सब आपका स्वार्थ आपसे करवाता है।  समझे किसी से  काम हो तो उसके पास जाना और काम  निकलने पर फिर मुँह मोड़ लेना।  यहां भी कुछ ऐसा ही है दोस्त से जब तक बात होती है जब तक आपके पास खाली समय है , जैसे ही आप व्यस्त हुए वैसे ही  दोस्त के लिए समय नहीं तो ये सब आपका स्वार्थ ही है। 

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चलो हम स्वार्थ अमीर वर्ग , मध्यम वर्ग और गरीब वर्ग में देखते है।  

अमीर वर्ग - अमीर  व्यक्ति कभी भी मध्यम और गरीब व्यक्ति पर ध्यान नहीं देता है।  वह बस उन्हें अपने नौकरो की तरह समझता है। और वह बस  यह कोशिश करता है की वह कैसे और अमीर बने , उसे इस बात से कोई मतलब नहीं है की गरीब उसके सामने मर रहा है तो उसकी मदद कर दे।  ये सब उस अमीर वर्ग का स्वार्थ करवाता है। जो उसे माध्यम और गरीब वर्ग से अलग करता है।

मध्यम वर्ग - इसमें वह मनुष्य आते है, जो बस अपने स्वार्थ के चलते सपने सजाते है , और अपनी जिंदगी  उसे पूरा करने में लगा देते है,  आप कभी भी देखना ऐसा मनुष्य आपको कभी भी राजनीती या फिर किसी आंदोलन में इतनी जल्दी नहीं दिखाई देगा, क्योकि उसका स्वार्थ उसे इन चीजों की अनुमति नहीं देता , उसके स्वार्थ को पता  है कि अगर वह एक दिन काम पर नहीं गया तो वह और उसके बच्चे  खायेगे क्या। इस वजह से यह मनुष्य अपने स्वार्थ  के लिए अपनी लड़ाई भी नहीं लड़ पता है। 

गरीब वर्ग - इस वर्ग का मनुष्य इतना स्वार्थी होता है कि उसे अमीर और माध्यम वर्ग के लोगो से कोई फर्क नहीं पड़ता है।  वह कोई सपने नहीं संजोता है।  क्योकि उसे पता है कि शाम को उसे दारू या नशा करके सोना है और अगले दिन भी  फिर ऐसे ही करना है।  तो इन मनुष्य का स्वार्थ  उन्हें कुछ और सोचने  ही नहीं देता। 

आपको पता है की आज के समय में ज्यादातर ऑटो वाले या फिर किसी मिस्त्री या फिर किसी फल बेचने वाले के बच्चे ही सरकारी नौकरी में अच्छी उपलब्धि कैसे प्राप्त कर रहे है।  क्योकि उनके परिवार वालो ने उनके लिए सपने सजाये जो उनके माता-पिता का स्वार्थ था , और जिसे उन्होंने पूरा करके दिखाया ये बच्चो का स्वार्थ था। 

आज के समय में जैसी राजनीति चल रह रही है , यह बस उन  राजनेताओ का स्वार्थ है , जिस तरह आज के समय में हम आम जनता के बुरे  हलात है , और हम कुछ बोल नहीं पाते ये हमारा स्वार्थ है। 

कहने को तो बहुत कुछ है लेकिन इतना ही काफी है।  मुझे उम्मीद है कि आप सबको समझ आ गया होगा की हम सब स्वार्थी है , बस हमे किसी दूसरे  को बोलने से पहले यह सोचना चाहिए की हम भी तो स्वार्थी है , बस यह सोच ले की वह ज्यादा स्वार्थी निकलना हम थोड़े कम है।  क्योकि जब भी  हम खुद को तसल्ली देते है तो हमारा स्वार्थ हमे समझता है कि कोई नहीं जो हुआ अच्छा हुआ , या फिर जो होता अच्छे के लिए होता है।  इस पर हमारा कोई बस नहीं था।  बस हमे अपने स्वार्थ पर थोड़ा काबू पाना चाहिए , जिससे आप किसी को हानि ना पहुंचा सके।   

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